कहाँ जाएं
हो गई साँझ.. पंछी भागे घोंसले की ओर…. कर्महीन……….. जाए कहाँ………?….?…?..?.??
खिल-खिलाओ
खिलखिलाते बचपन को मिले, खिलखिलाता यौवन, जिंदगी मुस्कान बन जाएगी 😊
दिन ढला
दिन ढला अब शाम होनेवाली है, जीवन यूँ ही तमाम गुजरने वाली है, किसी एक…
प्रेम औषधि
शब्दार्थ को ना समझे, समझ जाय जो भाव, अपना है वो पराया नहीं, प्रेम औषधि…