भोला भंडारी
कर के स्वयं विषपान, हमें अमृत दिया. अन्त के साथ होती नई शुरुआत,हारो नहीं तुम,…
वीरों का ऐसा हो वसंत
आ गई वसंत की बहार कोकिल कूके बार – बार प्राची की आँगन से उठी…
किसलय सा कोमल
किसलय सा कोमलबच्चे की किलकारी. नई दुल्हनिया औरउसकी कुसुम रंग साड़ी. कोमल मन परहै, छवि…
पा जायेंगे
तुम स्वयं हमें मिलो ना मिलो,हम तुम्हें पा जाएंगे.गम रख अपने पास ही,खुशी तुम संग…
फिर से एक बार
माँ, तुम चाहती “तुम्हे चाहा जाय “फिर से एक बार.क्युँकि ढलान पर हो उम्र की,नीड़…
जीवन की परीक्षा
मैं साधारण परिवार की लड़की अभाव में पली -बढ़ी. उम्र जब चौबीस पार करने लगी…